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उज्जैन में वकील का बड़ा घोटाला: कोर्ट फीस की फर्जी रसीदों से किया ₹5.81 लाख का फ्रॉड, बड़नगर पुलिस ने दर्ज की FIR; रीडर की शिकायत पर हुआ खुलासा!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक वकील ने कोर्ट फीस की फर्जी रसीदें बनाकर 5 लाख से अधिक का घोटाला कर दिया। यह मामला बड़नगर कोर्ट का है, जहाँ आरोपी वकील ने तीन वर्षों तक कोर्ट फीस जमा करने की प्रक्रिया में हेराफेरी करते हुए फर्जीवाड़ा किया। फिलहाल, आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
रीडर की शिकायत पर हुआ खुलासा
बड़नगर थाना प्रभारी अशोक कुमार पाटीदार के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन कोर्ट के रीडर योगेश ठाकुर ने 10 नवंबर को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया कि व्यास कॉलोनी निवासी वकील उज्जवल जोशी ने दीवानी मुकदमों में कोर्ट फीस जमा करने के नाम पर धोखाधड़ी की।
जोशी ने फर्जी रसीदें बनाकर उन्हें विभिन्न केसों में अदालत में पेश किया। जब इन रसीदों का सत्यापन कराया गया, तो सभी नकली पाई गईं। आरोपी कम राशि जमा कर रसीद में अतिरिक्त “0” जोड़ देता था, जिससे रकम बढ़कर हजारों से लाखों में दिखने लगती थी। इस तरीके से उसने अब तक ₹5,81,085 की धोखाधड़ी की।
तीन साल तक चलता रहा फर्जीवाड़ा
पुलिस जांच में पता चला है कि उज्जवल जोशी ने साल 2022 से 2025 के बीच यह फर्जीवाड़ा किया। यदि किसी केस में ₹1 लाख कोर्ट फीस जमा करनी होती थी, तो वह केवल ₹10,000 का भुगतान करता और ऑनलाइन रसीद में शून्य बढ़ाकर राशि ₹1 लाख दिखा देता था।
आरोपी उज्जवल जोशी मूलतः बड़नगर निवासी है। इससे पहले वह इंदौर कोर्ट में प्रैक्टिस करता था, लेकिन 2022 से बड़नगर कोर्ट में सक्रिय था।
फर्जीवाड़ा ऐसे हुआ संभव
दीवानी मामलों — जैसे जमीन-जायदाद, किरायेदारी विवाद या चेक बाउंस केसों में कोर्ट फीस हाईकोर्ट की अधिकृत वेबसाइट पर जमा करनी होती है। इसमें पार्टी का नाम, कोर्ट का नाम, फीस की राशि, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी डालकर ऑनलाइन भुगतान किया जाता है।
आरोपी ने इस प्रक्रिया का गलत फायदा उठाया। उसने सभी फर्जी रसीदों में अपना ही मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी डाला हुआ था, जिससे ओटीपी उसके फोन पर ही आता था और फर्जीवाड़ा लंबे समय तक पकड़ा नहीं गया।
कोर्ट में किया अपराध स्वीकार
मामले का खुलासा तब हुआ जब 15 नवंबर 2025 को एक केस की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि ₹2.80 लाख फीस की रसीद फर्जी है। जब वकील उज्जवल जोशी से स्पष्टीकरण मांगा गया, तो उसने अपराध स्वीकार करते हुए असली ₹2.80 लाख की फीस जमा कर दी।
इसके बाद अदालत ने उसके अन्य मामलों की फाइलों की जांच कराई। जांच में यह सामने आया कि पहले की कई रसीदें भी फर्जी थीं। इस पर कोर्ट रीडर योगेश ठाकुर ने पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
वकालत की सनद पर भी संदेह
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि उज्जवल जोशी की वकालत की सनद भी किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर जारी है। इस पहलू की भी अलग से जांच की जा रही है।
पुलिस जांच जारी
बड़नगर थाना प्रभारी ने बताया कि मामले में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और न्यायालय को भ्रमित करने के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है। फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने अन्य जिलों या कोर्टों में भी इसी तरह की जालसाजी की है।